मणिपुर में फिर भड़का तनाव, 6 नागा बंधकों के शव मिलने से हालात गंभीर

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मणिपुर में एक बार फिर हिंसा और तनाव ने गंभीर रूप ले लिया है।

लंबे समय से लापता छह नागा नागरिकों के शव बरामद होने के बाद राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इस घटना ने पहले से संवेदनशील माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ और असम राइफल्स के लगभग 450 जवानों ने स्निफर डॉग्स और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से व्यापक तलाशी अभियान चलाया। करीब 24 घंटे तक चले इस संयुक्त ऑपरेशन के बाद बुधवार दोपहर छह शव बरामद किए गए। शवों की पहचान उन नागा नागरिकों के रूप में की गई है, जो पिछले कई सप्ताह से लापता थे।

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 13 मई को हुई थी, जब कांगपोकपी और सेनापति जिलों में कुकी और नागा समुदायों से जुड़े सशस्त्र गुटों द्वारा बड़ी संख्या में लोगों को बंधक बनाए जाने की खबर सामने आई थी। बताया जाता है कि यह तनाव उस घटना के बाद बढ़ा, जिसमें नागालैंड में शांति वार्ता से लौट रहे तीन चर्च नेताओं की घात लगाकर हत्या कर दी गई थी।

मंगलवार को नागा संगठनों की पहल पर 14 कुकी बंधकों को मानवीय आधार पर रिहा कर दिया गया था। इसके बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि लापता छह नागा नागरिक भी सुरक्षित वापस लौट आएंगे। हालांकि, अगले ही दिन उनके शव मिलने से स्थिति और अधिक गंभीर हो गई।

घटना के विरोध में विभिन्न नागा संगठनों और स्थानीय समूहों ने प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। कोउब्रो रेंज लियांगमेई महिला संघ के नेतृत्व में नेशनल हाईवे-2 पर नामडिलोंग गांव गेट के पास धरना दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य और केंद्र सरकार पर बंधकों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगाया।

इसी बीच, क्षेत्र में जारी तनाव का असर यातायात और आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ा है। अपहरण और हिंसा की घटनाओं के बाद विभिन्न समुदायों द्वारा लगाए गए आर्थिक अवरोधों के कारण राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

मणिपुर पिछले तीन वर्षों से जातीय हिंसा और सामुदायिक संघर्ष की चुनौतियों का सामना कर रहा है। मई 2023 में शुरू हुई हिंसा के बाद सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े। राज्य में कई बार सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके हैं।

छह नागा नागरिकों के शव मिलने की घटना ने एक बार फिर शांति बहाली की कोशिशों को झटका दिया है और राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।

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