तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में अपने संबोधन के दौरान एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया।
उन्होंने दक्षिण एशिया में कश्मीर समेत सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के दायरे में बातचीत के जरिए सुलझाने की बात कही। एर्दोगन ने कहा कि क्षेत्र में विवादों के समाधान के लिए बातचीत और रचनात्मक कदम जरूरी हैं। उन्होंने दावा किया कि सकारात्मक और रचनात्मक प्रयासों के जरिए सभी मुद्दों का समाधान संभव है। भारत लंबे समय से जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा बताता रहा है और कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का विरोध करता है।
पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ तुर्किये का रक्षा समझौता
एर्दोगन का यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले महीने तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत तीनों देशों ने साझा सुरक्षा और रक्षा सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई है। इसमें किसी एक देश पर सशस्त्र हमला तीनों पर हमला माना जाएगा।
सऊदी अरब के समर्थन में तुर्किये-पाकिस्तान समेत चार देश
संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर 21 सितंबर को तुर्किये, पाकिस्तान, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों की न्यूयॉर्क में बैठक भी हुई। संयुक्त बयान में चारों देशों ने सऊदी अरब की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा के समर्थन की बात कही तथा अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत उसके आत्मरक्षा के अधिकार को रेखांकित किया।
यह बयान यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर जारी हमलों के बीच आया है। चारों देशों ने क्षेत्र में समुद्री आवाजाही की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया। साथ ही, उन्होंने क्षेत्रीय संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति को जरूरी बताया।
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