यमन में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता गहराती नजर आ रही है।
देश के प्रधानमंत्री सलेम बिन ब्रिक ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे सऊदी अरब समर्थित प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) ने स्वीकार कर लिया है। उनके इस्तीफे के तुरंत बाद सरकार ने नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति भी कर दी है।
विदेश मंत्री शाय्या मोहसिन जिंदानी को यमन का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। सरकारी समाचार एजेंसी सबा के मुताबिक, जिंदानी को अगली मंत्रिपरिषद के गठन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बढ़ते तनाव के बीच इस्तीफा
प्रधानमंत्री सलेम बिन ब्रिक ने ऐसे समय में पद छोड़ा है, जब यमन गंभीर राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। उनके इस्तीफे के पीछे हाल के महीनों में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच बढ़ता तनाव एक अहम वजह माना जा रहा है, जिसका सीधा असर यमन की सत्ता संरचना पर पड़ा है।
दक्षिणी यमन में UAE समर्थित समूहों की बढ़त
दिसंबर में UAE समर्थित अलगाववादी संगठन दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (STC) ने दक्षिणी और पूर्वी यमन के कई इलाकों पर कब्जा कर लिया था और सऊदी सीमा के नजदीक तक अपनी मौजूदगी बढ़ा दी थी। सऊदी अरब ने इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना। बाद में सऊदी समर्थित बलों ने इन इलाकों के बड़े हिस्से से STC को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
सऊदी–UAE तनाव की पृष्ठभूमि
विशेषज्ञों के मुताबिक, भू-राजनीतिक हितों, क्षेत्रीय प्रभाव और तेल उत्पादन से जुड़े मतभेदों ने सऊदी अरब और UAE के रिश्तों में खटास पैदा की है। हालांकि दोनों देश पहले यमन के गृहयुद्ध में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ गठबंधन के तहत साथ काम कर चुके हैं।
इस संघर्ष के दौरान यमन दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक का गवाह बना, जहां लाखों लोग भुखमरी, विस्थापन और हिंसा से प्रभावित हुए। मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से यमन की स्थिति और जटिल होने की आशंका जताई जा रही है।
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