ईरान से लंबे संघर्ष के बाद अमेरिका में हथियारों का संकट? पेंटागन ने डिफेंस कंपनियों को दिया 21 दिन का अल्टीमेटम
ईरान के साथ पांच महीने से ज्यादा समय से जारी संघर्ष के बीच अमेरिका को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि लंबे सैन्य अभियान के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन के सामने हथियारों के स्टॉक को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, संघर्ष के दौरान बड़ी संख्या में सटीक मिसाइलों और एयर-डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल होने से अमेरिकी सेना के हथियार भंडार में काफी कमी आई है। स्थिति को देखते हुए पेंटागन ने देश की प्रमुख डिफेंस कंपनियों को 21 दिनों के भीतर उत्पादन बढ़ाने की विस्तृत योजना पेश करने का निर्देश दिया है।
THAAD और Patriot के स्टॉक में बड़ी गिरावट का दावा
सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि अमेरिका के कुछ प्रमुख मिसाइल-डिफेंस सिस्टम के स्टॉक में बड़ी कमी आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, THAAD और Patriot सिस्टम से जुड़े स्टॉक में करीब 38% से 65% तक की गिरावट देखी गई है। इसके अलावा, ईरान के खिलाफ अभियान में अमेरिका द्वारा बड़ी संख्या में Tomahawk क्रूज मिसाइलों के इस्तेमाल का भी दावा किया गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा उत्पादन क्षमता की रफ्तार को देखते हुए इस्तेमाल किए गए हथियारों की भरपाई में कई साल लग सकते हैं।
नया संकट आया तो बढ़ सकती है अमेरिकी चिंता
अमेरिकी रक्षा योजनाकारों के सामने एक और बड़ी चुनौती भविष्य में किसी नए सैन्य संकट की स्थिति है। खास तौर पर पश्चिम एशिया के बाद अगर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन या ताइवान से जुड़ा कोई बड़ा तनाव पैदा होता है, तो मौजूदा हथियार भंडार पर दबाव बढ़ सकता है।
इसी वजह से कुछ विशेषज्ञ मौजूदा स्थिति को अमेरिकी सैन्य क्षमता के लिए एक चुनौतीपूर्ण दौर के तौर पर देख रहे हैं।
पेंटागन ने डिफेंस कंपनियों से मांगी तेज उत्पादन की योजना
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय अब हथियारों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। उप-रक्षा सचिव स्टीव फीनबर्ग की ओर से डिफेंस कंपनियों को उत्पादन प्रक्रिया तेज करने और डिलीवरी क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Lockheed Martin और Northrop Grumman जैसी कंपनियों के साथ अरबों डॉलर के समझौते किए गए हैं। इनका मकसद Patriot और THAAD सिस्टम के लिए जरूरी पुर्जों और रॉकेट मोटर्स के उत्पादन को बढ़ाना है।
पेंटागन का लक्ष्य Patriot सिस्टम का उत्पादन करीब तीन गुना और THAAD का उत्पादन करीब चार गुना करने का बताया जा रहा है।
हथियारों का स्टॉक फिर भरने में लगेगा कई साल
CSIS के अनुमान के अनुसार, युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए गए हथियारों की भरपाई तुरंत नहीं हो पाएगी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि THAAD और Patriot के स्टॉक को मौजूदा स्तर पर वापस लाने में 2029 के अंत तक, जबकि Tomahawk मिसाइलों के भंडार को पूरी तरह बहाल करने में 2030 के अंत तक का समय लग सकता है।
यानी अमेरिका के सामने सिर्फ तत्काल हथियारों की उपलब्धता का सवाल नहीं है, बल्कि लंबे समय में अपनी सैन्य क्षमता और उत्पादन श्रृंखला को मजबूत करने की चुनौती भी है।
ट्रंप ने हथियारों की कमी की खबरों को नकारा
हालांकि, अमेरिका में हथियारों की भारी कमी से जुड़ी रिपोर्ट्स को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खारिज किया है। उनका कहना है कि अमेरिका के पास हथियारों का बड़ा भंडार मौजूद है और जरूरत के मुताबिक नए हथियारों का उत्पादन भी लगातार किया जा रहा है।
पेंटागन का भी कहना है कि अमेरिकी सेना के पास मौजूदा अभियानों को जारी रखने के लिए पर्याप्त हथियार मौजूद हैं। हालांकि, युद्ध के दौरान बड़ी मात्रा में इस्तेमाल किए गए हथियारों के भंडार को दोबारा भरने में लंबा समय लग सकता है।
रक्षा बजट पर कांग्रेस में भी खींचतान
इस बीच अमेरिकी कांग्रेस में रक्षा बजट को लेकर बहस जारी है। ट्रंप प्रशासन ने रक्षा खर्च को बढ़ाकर करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने का प्रस्ताव रखा है।
अब अमेरिका के सामने चुनौती दोहरी है—एक तरफ मौजूदा हथियार भंडार को फिर से भरना और दूसरी तरफ भविष्य के संभावित संघर्षों के लिए पर्याप्त सैन्य क्षमता बनाए रखना। इसी के चलते अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर तेजी से जोर दिया जा रहा है।
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