40 साल पुरानी इमारत में अवैध निर्माण, बारिश में तालाब बन जाता था बेसमेंट; दिल्ली PG हादसे के बड़े खुलासे

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राजधानी दिल्ली में एक बार फिर अवैध निर्माण और लापरवाही पर सवाल खड़े हुए हैं।

दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार दोपहर एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे में अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत और बचाव अभियान के दौरान मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी रही।

हादसे के बाद सामने आई शुरुआती जानकारी में इमारत के निर्माण और उसके इस्तेमाल को लेकर कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि करीब 40 साल पुरानी इस इमारत में बिना अनुमति निर्माण कराकर दो मंजिल से पांच मंजिल तक विस्तार किया गया था। इतना ही नहीं, बेसमेंट का निर्माण भी बाद में किया गया। बारिश के दौरान बेसमेंट में पानी भरने की समस्या रहती थी, जिससे इमारत की संरचना और नींव पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

अवैध रूप से चल रहा था PG

जांच में सामने आया है कि करीब 100 गज में बनी इस पांच मंजिला इमारत में ‘हॉस्टल डेज’ नाम से PG का संचालन किया जा रहा था। यहां दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के छात्र रह रहे थे। हादसे के वक्त बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान इमारत का एक हिस्सा अचानक ढह गया और देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो गई।

हादसे में दो छात्रों समेत छह लोगों की मौत हुई है। मलबे से निकाले गए 10 अन्य छात्रों और श्रमिकों को एम्स ट्रॉमा सेंटर, सफदरजंग अस्पताल और आरआर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुछ लोगों के अभी भी मलबे में फंसे होने की आशंका के चलते तलाश अभियान जारी रहा।

मलबे में दबे लोगों की तलाश

हादसे के बाद NDRF, दमकल विभाग, दिल्ली पुलिस और स्थानीय लोगों के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र भी राहत एवं बचाव अभियान में जुट गए। भारी मलबे को हटाकर उसमें फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।

साउथ कैंपस थाना पुलिस ने भवन मालिक हरिओम बंसल के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी गुरुग्राम के सेक्टर-23 में रहता है और उसकी तलाश की जा रही है।

छह लोगों की मौत, एक घायल को मिली छुट्टी

पुलिस अधिकारी के अनुसार, एम्स ट्रॉमा सेंटर लाए गए घायलों में से छह की मौत हो चुकी है। मृतकों में छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी युवराज और के. अभिषेक की पहचान हुई है, जबकि अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

एक घायल को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। बाकी घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

40 साल पहले बनी थी दो मंजिला इमारत

पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि इमारत करीब 40 साल पहले दो मंजिल की बनी थी। बाद में इसमें बेसमेंट तैयार किया गया और तीन अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण कर इसे पांच मंजिला इमारत बना दिया गया।

इमारत की ऊपरी मंजिलों का इस्तेमाल PG के रूप में किया जा रहा था, जबकि भूतल पर दुकानें बनी थीं। बताया जा रहा है कि ये दुकानें लंबे समय से बंद थीं।

पिछले साल लीज पर दिया गया था PG

पुलिस सूत्रों के अनुसार, भवन मालिक हरिओम बंसल ने पिछले साल ही शुधांशु शुक्ला नाम के व्यक्ति को ‘हॉस्टल डेज’ PG चलाने के लिए इमारत लीज पर दी थी।

हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान इमारत ढह गई। हालांकि, इमारत गिरने की वास्तविक वजह क्या थी, यह विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

PG के संचालन के कारण हादसे के वक्त इमारत में बड़ी संख्या में DU के छात्रों के मौजूद होने की बात सामने आई है।

दोपहर 1:34 बजे मिली थी सूचना

DCP अमित गोयल के मुताबिक, रविवार दोपहर करीब 1:34 बजे साउथ कैंपस थाना पुलिस को सत्य निकेतन मार्केट में इमारत गिरने की PCR कॉल मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल और बचाव दल मौके पर पहुंचे और मलबा हटाने का अभियान शुरू किया।

यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब दिल्ली में अवैध निर्माण और भवन सुरक्षा को लेकर पहले भी गंभीर सवाल उठते रहे हैं। गत 30 मई को सैदुलाजाब में भी पांच मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हुई थी। सत्य निकेतन हादसे के बाद एक बार फिर निर्माण नियमों के पालन और जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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