छठ महापर्व 2025: आज डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का दिन, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
आज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है, जिसे पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ छठ महापर्व के रूप में मनाया जा रहा है। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। लोक आस्था से जुड़े इस महान पर्व के तीसरे दिन व्रती महिलाएं और पुरुष पूरे दिन निर्जल रहकर संध्या के समय डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य अर्पित करेंगे और अपने परिवार की सुख-समृद्धि व संतान की मंगलकामना करेंगे।
छठ पूजा 2025 का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की षष्ठी तिथि 27 अक्टूबर 2025 को प्रातः 06:04 बजे से शुरू होकर 28 अक्टूबर को सुबह 07:59 बजे तक रहेगी।
- सूर्योदय: 06:30 बजे
- सूर्यास्त (संध्या अर्घ्य का समय): 05:40 बजे
इसी समय सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व माना गया है।
तीसरे दिन की पूजा विधि
नहाय-खाय और खरना के बाद छठ का तीसरा दिन सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दिन व्रती 36 घंटे का कठोर निर्जल व्रत रखते हैं। संध्या के समय वे सूर्य देव को पहला अर्घ्य देते हैं, जबकि दूसरा अर्घ्य अगले दिन प्रातः सूर्योदय के समय दिया जाता है।
अर्घ्य देने के लिए व्रती महिलाएं सूप या बांस की टोकरी में पूजा सामग्री जैसे —
फल, फूल, ठेकुआ, गन्ना, नारियल, चावल के लड्डू और दीपक रखकर नदी, तालाब या किसी छठ घाट पर पहुंचती हैं।
सूर्यास्त के समय, वे पीतल या कांसे के पात्र में जल भरकर ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करती हैं। इसके बाद सूर्य देव और छठी मैया की विधिवत पूजा की जाती है।
छठ महापर्व का महत्व
छठ पूजा का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि यह एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें सूर्य देव को संध्या के समय अर्घ्य दिया जाता है। मान्यता है कि इस समय सूर्य देव अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं, और इसी क्षण दिया गया अर्घ्य संतान एवं परिवार की मंगलकामना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
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