दिल्ली-एनसीआर में दम घोंटू हवा! कई इलाकों में AQI ‘खतरनाक’ स्तर पर पहुँचा

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जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है, दिल्ली-एनसीआर की हवा और जहरीली होती जा रही है।

राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है। रविवार सुबह आनंद विहार में AQI 430 और वजीरपुर में 406 दर्ज किया गया — दोनों ही ‘गंभीर’ श्रेणी में आते हैं। कई इलाकों में घना स्मॉग छाया रहा, जिससे दृश्यता घटी और लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा।

दिल्ली में कहां कितना प्रदूषण
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, रविवार सुबह 6 बजे दिल्ली का औसत AQI 320 दर्ज किया गया। आनंद विहार (430), वजीरपुर (406), विवेक विहार (372), जहांगीरपुरी (372), चांदनी चौक (375), रोहिणी (359) और पंजाबी बाग (352) सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में रहे।

लोगों की सेहत पर असर
‘लोकल सर्किल्स’ के एक सर्वे में सामने आया है कि दिल्ली-एनसीआर के हर चार में से तीन परिवार पहले ही प्रदूषण के दुष्प्रभाव महसूस कर रहे हैं। गले में खराश, खांसी, आंखों में जलन, सिरदर्द और नींद में दिक्कतें अब आम हो गई हैं। विशेषज्ञों ने बुजुर्गों, बच्चों और फेफड़ों के मरीजों को खास सतर्क रहने की सलाह दी है।

दिवाली के बाद फिर चरम पर पहुंचा प्रदूषण
CPCB के विश्लेषण के अनुसार, दिवाली के बाद पीएम 2.5 कणों का स्तर 488 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया — जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है और त्योहार से पहले के स्तर (156.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) से तीन गुना ज्यादा है। 20 अक्टूबर की रात और अगली सुबह प्रदूषण अपने चरम पर था।

पराली कम जली, फिर भी नहीं सुधरी हवा
पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में इस बार 77% की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद दिल्ली की हवा खतरनाक बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय प्रदूषण स्रोत — जैसे वाहन उत्सर्जन, निर्माण धूल और ठंड के चलते ठहरी हवाएं — वायु गुणवत्ता बिगाड़ने के प्रमुख कारण हैं।

प्रशासन अलर्ट पर
दिल्ली सरकार ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत निर्माण गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी है और प्रदूषण नियंत्रण उपायों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, डॉक्टरों ने लोगों को एन-95 मास्क पहनने, घर से कम निकलने और सुबह-शाम की सैर से बचने की सलाह दी है।

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