CJI गवई वियतनाम में: वकील और जज सुनिश्चित करें कि न्याय प्रणाली हर नागरिक के लिए सुलभ रहे

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प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई ने शनिवार को कहा कि वकीलों और न्यायाधीशों की जिम्मेदारी है कि वे न्याय प्रणाली को मजबूत और सुलभ बनाएं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि न्याय की पहुंच सिर्फ महानगरों तक सीमित न रहे, बल्कि देश के दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए भी समान रूप से उपलब्ध हो।

वियतनाम के हनोई में आयोजित ”ला एशिया” सम्मेलन को संबोधित करते हुए CJI गवई ने कहा कि न्यायाधीशों द्वारा अपने फैसलों में अपनाए गए सिद्धांत न्यायालय की प्रशासनिक नीतियों में भी परिलक्षित होने चाहिए।

हाशिये पर पड़े समुदायों को प्रशासनिक नियुक्तियों में उचित हिस्सा:
CJI ने बताया कि जब उन्होंने मई में भारत के प्रधान न्यायाधीश का पद संभाला, तो उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक यह सुनिश्चित करना था कि प्रशासनिक पदों की नियुक्तियों में सकारात्मक कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि पूरी तरह लागू हो। उन्होंने निर्देश दिए कि हाशिये पर पड़े समुदायों को सभी प्रशासनिक नियुक्तियों में उनका उचित हिस्सा मिले और इन नीतियों को पारदर्शी व सुसंगत तरीके से लागू किया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत के संविधान में गौतम बुद्ध, महात्मा गांधी और बीआर आंबेडकर द्वारा प्रतिपादित समानता का सपना निहित है, जिसने ऐतिहासिक रूप से हाशिये पर रहे लाखों लोगों के जीवन को बदल दिया। वकीलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मातृत्व अवकाश या समय की कमी जैसी धाराओं के कारण महिलाओं को नियुक्ति में कोई बाधा न आए।

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