अमरनाथ यात्रा में सात दिन में एक लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की गई

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अमरनाथ यात्रा: सात दिनों में 1.11 लाख श्रद्धालु पहुंचे गुफा मंदिर, सुरक्षा के बावजूद बढ़ती भीड़ से प्रशासन हैरान

अमरनाथ यात्रा इस वर्ष श्रद्धालुओं के जबरदस्त उत्साह के बीच जारी है। केवल सात दिनों में ही 1 लाख 11 हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। खास बात यह है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु जम्मू से निर्धारित सुरक्षा काफिलों के बजाय सीधे कश्मीर पहुंचकर यात्रा शुरू कर रहे हैं, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

पहलगाम हमले के बावजूद नहीं टूटा विश्वास
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यात्रा शुरू हुई थी। बावजूद इसके श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। हजारों लोग अब भी पहलगाम और बालटाल रूट से हिमालय की कठिन चढ़ाई तय कर बाबा बर्फानी के दर्शन को निकल रहे हैं।

अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा तैनाती
इस बार अमरनाथ यात्रा में सुरक्षा के लिहाज से अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। घाटी में पहले से तैनात सुरक्षाबलों के अतिरिक्त करीब 600 अर्धसैनिक कंपनियां यात्रा मार्गों पर विशेष ड्यूटी पर लगाई गई हैं। जम्मू से रोजाना औसतन 7,000 श्रद्धालु निर्धारित काफिलों के ज़रिए रवाना हो रहे हैं, जिनके साथ भारी सुरक्षा तैनात रहती है।

तय काफिलों के बाहर यात्रा का चलन
हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु बिना काफिले के यात्रा करना पसंद कर रहे हैं। मंगलवार को अमरनाथ गुफा में दर्शन करने वालों की संख्या 26,000 थी, जबकि जम्मू से उसी दिन निर्धारित काफिले में केवल 7,000 लोग रवाना हुए थे।

दिल्ली से आए यात्री अमित ने बताया, “काफिले से बाहर यात्रा करना आसान लगता है। सुरक्षा कड़ी जरूर है, लेकिन इससे बाहर घूमने और घाटी की खूबसूरती को महसूस करने की आज़ादी मिलती है।”

प्रशासन की अपील, श्रद्धालु अब भी बेपरवाह
प्रशासन बार-बार अपील कर रहा है कि श्रद्धालु जम्मू से निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के तहत ही यात्रा करें। अब तक जम्मू से 8 जत्थे रवाना हो चुके हैं, जिनमें करीब 55,382 श्रद्धालु शामिल थे। लेकिन इतने सख्त प्रोटोकॉल के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु सीधे कश्मीर पहुंचकर यात्रा आरंभ कर रहे हैं।

श्रद्धालुओं का विश्वास सुरक्षा से बड़ा
श्रद्धालुओं का मानना है कि रास्ते में मौजूद सुरक्षाबलों की मौजूदगी उन्हें पर्याप्त भरोसा देती है। यात्रियों की निर्भीकता यह दिखाती है कि आतंक की घटनाएं उनकी आस्था को डिगा नहीं सकीं।

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