पाकिस्तान ने अमेरिका को अरब सागर के तट पर नया बंदरगाह बनाने और उसे संचालित करने का प्रस्ताव दिया है।
यह प्रस्ताव पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के करीबी सलाहकारों द्वारा अमेरिकी अधिकारियों को दिया गया है। फाइनेंशियल टाइम्स (FT) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना के तहत अमेरिकी निवेशक बलूचिस्तान के पासनी शहर में एक नया टर्मिनल विकसित करेंगे। विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से पाकिस्तान, एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लुभाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर यह कदम चीन और भारत दोनों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
अमेरिका के लिए रणनीतिक मौका
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस बंदरगाह से अमेरिका को दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में से एक — अरब सागर — में रणनीतिक रूप से पैर जमाने का मौका मिलेगा।
पासनी, जो एक मछुआरों का शहर है, पाकिस्तान के महत्वपूर्ण खनिज भंडारों तक अमेरिका की पहुंच आसान बना सकता है। हालांकि अब तक न तो पाकिस्तान और न ही अमेरिका की ओर से इस योजना पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया दी गई है।
चीन और भारत के लिए नया समीकरण
पासनी का स्थान भौगोलिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। यह ईरान से करीब 160 किलोमीटर और ग्वादर बंदरगाह से कुछ ही दूरी पर स्थित है।
ग्वादर बंदरगाह चीन की मदद से बना है, जबकि ईरान का चाबहार पोर्ट भारत द्वारा विकसित किया जा रहा है — जो पासनी से महज 300 किलोमीटर दूर है।
अगर अमेरिका यहां निवेश करता है, तो यह चीन के ग्वादर प्रोजेक्ट और भारत के चाबहार मिशन दोनों पर भू-राजनीतिक दबाव डाल सकता है।
पाकिस्तान की रणनीति: फायदा उठाने की कोशिश
FT की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव पाकिस्तान की आधिकारिक नीति नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि इस्लामाबाद दक्षिण एशिया की मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों से लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है।
जनरल मुनीर के दो असैन्य सलाहकारों ने बताया कि इस प्रस्ताव पर कुछ अमेरिकी अधिकारियों से प्रारंभिक बातचीत हो चुकी है।
हालांकि ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया है कि राष्ट्रपति या उनके सलाहकारों ने इस विषय पर कोई चर्चा की हो।
अरबों डॉलर की योजना
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित पासनी पोर्ट प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 1.2 अरब डॉलर है। इस योजना में बंदरगाह को पाकिस्तान के खनिज-समृद्ध इलाकों से जोड़ने के लिए नई रेल लाइन बिछाने की भी बात है।
खनिजों में तांबा और एंटीमनी शामिल हैं — जो बैटरी, रॉकेट और मिसाइल तकनीक के लिए अहम माने जाते हैं।
वित्तीय मॉडल अमेरिकी और पाकिस्तानी निवेश के मिश्रित रूप पर आधारित है।
तालिबान के बाद रिश्ते सुधारने की कोशिश
फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, यह पोर्ट किसी अमेरिकी सैन्य अड्डे के रूप में नहीं बनाया जाएगा। बल्कि इसे अफगानिस्तान में अमेरिकी युद्ध के दौरान बिगड़े रिश्तों को सुधारने की दिशा में एक नया प्रयास माना जा रहा है।
एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी ने कहा कि बंदरगाह का विचार अमेरिकी निवेशकों के साथ निजी बातचीत में सामने आया था, लेकिन इसे आधिकारिक स्तर पर मंजूरी नहीं मिली है।
ट्रंप और मुनीर की नजदीकियां
रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरल आसिम मुनीर और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हाल के महीनों में गहरे संबंध बने हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने ट्रंप की मध्यस्थता को सराहते हुए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया है।
एक पाकिस्तानी सलाहकार ने कहा, “युद्ध के बाद अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों की कहानी पूरी तरह बदल गई है।”
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