बंगाल का अनोखा मतदान: SIR के कारण सूने रहे पोलिंग बूथ, फीका पड़ा लोकतंत्र का उत्सव

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पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान गुरुवार को संपन्न हो गया, लेकिन मालदा जिले के कुछ गांवों में लोकतंत्र का यह उत्सव फीका नजर आया।

कई मतदाता ऐसे रहे, जिन्हें वोट डालने का मौका ही नहीं मिल सका, क्योंकि उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। एक रिपोर्ट के अनुसार, मोथाबाड़ी गांव में मतदान के दिन सैकड़ों लोग ऐसे थे, जिनके नाम सूची में नहीं थे। लोग इस उम्मीद में थे कि शायद उनका नाम जोड़ा जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे पहले इसी महीने यह गांव तब चर्चा में आया था, जब नाराज लोगों ने अधिकारियों के खिलाफ विरोध भी जताया था।

चुनाव के दिन यहां एक ही मुद्दा छाया रहा—‘SIR’। जिन लोगों ने वोट डाला, उनके बीच भी इसकी चर्चा थी, लेकिन सबसे ज्यादा असर उन पर पड़ा जो मतदान से वंचित रह गए।

अलीनगर के निवासी मतिउर रहमान ने बताया कि उन्होंने अपने सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए थे, फिर भी उनका और उनके परिवार के अन्य सदस्यों का नाम सूची से हटा दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वे पहले वोट डाल चुके हैं, तो इस बार उन्हें क्यों रोका गया।

इसी तरह, सरदारपारा इलाके की कई महिलाओं ने भी अपनी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि उन्होंने पिछले चुनावों, यहां तक कि 2024 के आम चुनाव में भी मतदान किया था, लेकिन इस बार उनके पहचान पत्र मान्य नहीं माने गए। महीनों तक दस्तावेज जमा करने और इंतजार के बावजूद वे मतदान नहीं कर सकीं।

महालदारटोला के 60 वर्षीय दिलीप एसके भी खुद को सूची से बाहर पाकर हैरान थे। उन्होंने बताया कि उनके बेटे का नाम सूची में है, लेकिन उनका नहीं, जबकि पहले उनके नाम के आधार पर ही परिवार के अन्य सदस्यों के नाम दर्ज हुए थे।

इन घटनाओं ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि मतदाता सूची में नामों के हटने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और सटीक है। फिलहाल, प्रभावित लोग उम्मीद कर रहे हैं कि अगली बार उन्हें अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर जरूर मिलेगा।

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