अमेरिका: टेनेसी में मृत्युदंड की सजा पर सवाल, जहरीला इंजेक्शन देने के बाद भी नहीं हुई क्रिस्टा पाइक की मौत

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जहरीले इंजेक्शन के दो डोज के बाद भी जिंदा बची क्रिस्टा पाइक, अब असहनीय दर्द से जूझ रही महिला

अमेरिका के टेनेसी राज्य में मृत्युदंड देने की कोशिश के दौरान एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां क्रिस्टा पाइक नाम की महिला को जानलेवा इंजेक्शन के दो डोज दिए गए, लेकिन इसके बावजूद उसकी मौत नहीं हुई। हालांकि, इस असफल प्रक्रिया के बाद से वह लगातार असहनीय शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेल रही है।

मौत की सजा देने के लिए पाइक को पेंटोबार्बिटल नामक दवा के दो डोज दिए गए थे। आमतौर पर इस दवा का इस्तेमाल घातक इंजेक्शन के रूप में किया जाता है। लेकिन इस मामले में इंजेक्शन दिए जाने के बावजूद पाइक की जान बच गई। अब उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में हुई चूक के लिए अधिकारियों की अक्षमता को जिम्मेदार ठहराया है।

‘उस रात के बाद से एक पल भी दर्द के बिना नहीं गुजरा’
मृत्युदंड देने की असफल कोशिश के करीब एक महीने बाद शुक्रवार को क्रिस्टा पाइक ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि वह लगातार दर्द से परेशान हैं और उन्हें बोलने में भी काफी मुश्किल हो रही है।

पाइक के मुताबिक, उन्होंने अपनी निर्धारित मृत्यु की तारीख के बाद जीवन के बारे में कभी कल्पना नहीं की थी। वह शांति से मरने के लिए तैयार थीं, लेकिन जब उन्हें होश आया तो उन्होंने खुद को अस्पताल के बिस्तर पर अकेला और भ्रमित पाया।

उन्होंने कहा, ‘उस रात के बाद से एक भी पल ऐसा नहीं बीता जब मुझे दर्द न हुआ हो। मेरे पूरे शरीर, बांहों, हाथों और गले में दर्द है। मुझे अब भी बोलने में बहुत परेशानी होती है। यह पीड़ा केवल शारीरिक नहीं है, बल्कि मेरे मन और आत्मा को भी गहरी चोट पहुंची है।’

1995 में सहपाठी की हत्या के मामले में मिली थी सजा
50 वर्षीय क्रिस्टा पाइक को 30 सितंबर को मृत्युदंड देने की कोशिश की गई थी। उन्हें 1995 में अपनी 19 वर्षीय सहपाठी कोलीन स्लेमर की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था।

वारदात के समय पाइक की उम्र महज 18 साल थी। आरोपों के मुताबिक, उन्होंने अपने प्रेमी के साथ मिलकर स्लेमर को प्रताड़ित किया और फिर चाकू से हमला कर उसकी हत्या कर दी। इस मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद पाइक को मौत की सजा सुनाई गई थी। वह अमेरिका में मृत्युदंड पाने वाली सबसे कम उम्र की महिलाओं में शामिल हो गई थीं।

अब जानलेवा इंजेक्शन की असफल प्रक्रिया और उसके बाद झेली जा रही पीड़ा ने मृत्युदंड की व्यवस्था तथा उसके क्रियान्वयन पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

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