इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जारी तनाव के बीच संघर्ष-विराम को तीन हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में हुई बैठक के बाद इसकी पुष्टि की। यह फैसला इजरायल और लेबनान के राजनयिकों के बीच हालिया बातचीत के बाद लिया गया।
बताया जा रहा है कि पिछले एक हफ्ते में यह दूसरी उच्चस्तरीय बैठक थी। शुरुआती संघर्ष-विराम लागू होने के बाद भी दोनों पक्षों की ओर से उल्लंघन की घटनाएं सामने आई थीं, जिसके चलते इसे आगे बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई।
करीब दो दशकों बाद इजरायल और लेबनान के बीच सीधी कूटनीतिक बातचीत हुई है। 1948 में इजरायल के गठन के बाद से दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं और औपचारिक रूप से युद्ध जैसी स्थिति बनी रही है। ऐसे में यह वार्ता अहम मानी जा रही है।
लेबनान की ओर से इस पहल का स्वागत किया गया है। वहां के प्रतिनिधियों ने अमेरिका की भूमिका की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में रास्ता निकल सकता है।
लेबनान के राष्ट्रपति ने भी संकेत दिया है कि भविष्य की वार्ताओं का लक्ष्य इजरायली हमलों को पूरी तरह रोकना, लेबनान से इजरायली सेना की वापसी, कैदियों की रिहाई और सीमा क्षेत्रों में स्थिरता बहाल करना होगा।
दूसरी ओर, इजरायल ने स्पष्ट किया है कि उसका मुख्य लक्ष्य हिजबुल्लाह से जुड़े सुरक्षा खतरे को खत्म करना है। इजरायल के विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच बड़े मतभेद नहीं हैं, लेकिन हिजबुल्लाह की गतिविधियां शांति में बाधा बनी हुई हैं।
गौरतलब है कि इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया में हिजबुल्लाह सीधे तौर पर शामिल नहीं है। संगठन के एक वरिष्ठ सदस्य ने संकेत दिया है कि वे इस तरह की वार्ताओं में हुए समझौतों को मानने के लिए बाध्य नहीं होंगे।
इन परिस्थितियों के बीच, लेबनान को उम्मीद है कि बातचीत के जरिए लंबे समय से जारी तनाव को कम करने और स्थायी समाधान की दिशा में प्रगति संभव हो सकेगी।
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