होर्मुज पर ट्रंप की बेचैनी बढ़ी, ईरान से परमाणु मुद्दे पर भी नरमी के संकेत

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होर्मुज खोलने पर ईरान-अमेरिका में बढ़ी सौदेबाजी, ट्रंप परमाणु समझौते को टालने पर कर सकते हैं विचार

होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बहाल करने को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत निर्णायक दौर में पहुंचने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, तेहरान ने संकेत दिया है कि केवल किसी समझौते पर पहुंचना पर्याप्त नहीं होगा। जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल करने के लिए अमेरिका को ईरान की कुछ प्रमुख शर्तें माननी होंगी।

इस घटनाक्रम ने अब गेंद सीधे अमेरिका के पाले में डाल दी है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने के बदले ईरान के साथ प्रस्तावित परमाणु समझौते को फिलहाल टालने पर विचार कर सकते हैं।

ईरान-ओमान के बीच बातचीत अंतिम दौर में

रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि होर्मुज से जुड़ी व्यवस्था को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत अंतिम चरण में है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही तब तक सामान्य नहीं होगी, जब तक ईरान की अन्य शर्तें पूरी नहीं की जातीं।

मेहर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत दोनों देशों के बीच एक अस्थायी समुद्री मार्ग तैयार किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल अमेरिका की ओर से ईरान की शर्तें स्वीकार किए जाने के बाद जहाजों की आवाजाही के लिए किया जा सकेगा।

अमेरिका से ईरान की क्या मांगें?

अराघची के मुताबिक ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से सीधी बातचीत नहीं हुई है। उनका आरोप है कि अमेरिका ने जून में हुए अंतरिम समझौते का उल्लंघन किया था। हालांकि, दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है।

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोल्घादर ने भी पहले कहा था कि होर्मुज को खोलने से पहले अमेरिका को ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध और नौसैनिक नाकेबंदी हटानी होगी।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान की अन्य मांगों में क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी खत्म करना, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और विदेशों में जमा ईरानी संपत्तियों को जारी करना शामिल है।

ईरान ने अपने सहयोगी देशों के खिलाफ हमले और तेहरान को दी जा रही धमकियां रोकने की मांग भी रखी है। इनमें लेबनान, फलस्तीन, यमन और इराक में ईरान से जुड़े समूहों पर होने वाले हमले शामिल हैं।

होर्मुज के बदले परमाणु समझौता टाल सकते हैं ट्रंप?

एएनआई ने वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि ट्रंप प्रशासन होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने को बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर पेश कर सकता है। इसके बदले ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक समझौते को बाद के लिए टाला जा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप पिछले कई हफ्तों से इस संभावित नतीजे की जमीन तैयार कर रहे हैं। उन्होंने अपने वरिष्ठ सहयोगियों को संकेत दिया है कि तेहरान के साथ किसी औपचारिक परमाणु समझौते के बिना भी आगे बढ़ने का विकल्प खुला रखा जा सकता है।

हालांकि, होर्मुज खोलने के बदले ईरान की व्यापक मांगों के कारण किसी ऐसे समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा, जिसे दोनों देशों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकार्यता मिल सके।

लाल सागर में भी बढ़ा तनाव

इसी बीच क्षेत्र में तनाव का एक और मोर्चा खुल गया है। रविवार को ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के महत्वपूर्ण बंदरगाह मोखा पर हमला किया।

एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, हमले में चार सैनिकों और तीन नागरिकों की मौत हुई, जबकि 15 लोग घायल हुए। सऊदी अरब की जाजान रिफाइनरी को भी मिसाइल और ड्रोन हमलों से निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।

सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, हमले से बंदरगाह, उसकी इमारतों और वहां रखे सामान को नुकसान पहुंचा। रिफाइनरी में लगी आग पर बाद में काबू पा लिया गया।

हूती प्रवक्ता याहया सारी ने दावा किया कि दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र की रिफाइनरी को निशाना बनाया गया। उनके मुताबिक, इस रिफाइनरी में रोजाना करीब चार लाख बैरल कच्चे तेल का शोधन होता है।

मक्का रक्षा समझौते के बाद पहला बड़ा हमला

ये हमले सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच त्रिपक्षीय मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के दो दिन बाद हुए हैं। ऐसे में इस हमले ने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

हालांकि, अगर आगे भी ऐसे हमले जारी रहते हैं तो इस रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान और तुर्किए किस तरह प्रतिक्रिया देंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

कुल मिलाकर, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक सौदेबाजी तेज होती दिख रही है। एक तरफ तेहरान अपनी शर्तों पर जोर दे रहा है, वहीं ट्रंप प्रशासन के सामने होर्मुज को खोलने और ईरान के परमाणु मुद्दे के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।

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