एनआईए की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि लालकिला के समीप 10/11 को हुए आत्मघाती हमले से करीब एक साल पहले, सफेदपोश आतंकियों ने फरीदाबाद के धौज क्रेशर जोन में विस्फोट का ट्रायल किया था।
यह जोन अलफलाह यूनिवर्सिटी से कुछ किलोमीटर दूर स्थित है। आतंकियों ने इसे इसलिए चुना था ताकि मशीनों की तेज आवाज में ट्रायल का धमाका दब जाए।
सीन रिक्रिएशन के दौरान आरोपित डाॅ. मुजम्मिल और डाॅ. शाहीन ने पुलिस और एनआईए टीम को ट्रायल स्थल की निशानदेही कराई। मौके से क्षतिग्रस्त स्टील पाइप भी बरामद किया गया, जिसमें अमोनियम नाइट्रेट और अन्य केमिकल मिलाकर विस्फोटक बनाया गया था। एनआईए सूत्रों के मुताबिक, विस्फोटक पाउडर 2024 में तैयार किया गया और उसकी तीव्रता मापने के लिए ट्रायल किया गया।
पूछताछ में डाॅ. शाहीन ने बताया कि सुरक्षित जगह तलाशने में कई दिन लगे। ट्रायल के दिन तीनों आरोपी अरावली भ्रमण की आड़ में क्रेशर जोन पहुंचे और स्टील पाइप में विस्फोटक भरकर एक चट्टान में फंसा कर विस्फोट किया। विस्फोट से चट्टान का हिस्सा बिखर गया और पाइप भी टूट गया।
धौज क्रेशर जोन में भारी मशीनों की आवाज़ का फायदा उठाकर ट्रायल किया गया। इसके बाद आरोपी यूनिवर्सिटी कैंपस पहुंचे और आकाओं को जानकारी दी। एनआईए ने इस खुलासे के बाद हरियाणा पुलिस और इंटेलिजेंस टीम की लापरवाही पर भी सवाल उठाए हैं। केंद्रीय गृहमंत्रालय के मुताबिक, इसे गंभीर मामला माना जा रहा है और संबंधित अधिकारियों से जवाबतलबी हो सकती है।
सूत्रों ने बताया कि आतंकियों ने फरीदाबाद में काफी पहले से धमाकों की योजना बनाई थी और ट्रायल अंजाम दिया गया, जबकि देश का सुरक्षा तंत्र नींद में था।
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