ट्रंप की मुस्लिम देशों संग बड़ी बैठक: इज़रायल की सख्ती से बढ़ी चिंता, पाकिस्तान- अरब जगत ने साधा नया सहारा
अमेरिका के न्यूयॉर्क में चल रही संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठकों के दौरान पूरी दुनिया की नजर इस पर टिकी है कि विभिन्न देश वैश्विक संघर्षों पर क्या रुख अपनाते हैं.
गाज़ा युद्ध से लेकर यूक्रेन तक की जंगों के बीच शांति की उम्मीदें इस मंच से जुड़ी हुई थीं. इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने महासभा के इतर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत मुस्लिम देशों के चुनिंदा नेताओं के साथ गाज़ा संकट पर विशेष बैठक की.
24 सितंबर को हुई इस बहुपक्षीय बैठक में तुर्की, क़तर, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन के शीर्ष नेता शामिल हुए. बैठक का मकसद गाज़ा में जारी युद्ध को रोकने और स्थायी शांति के लिए राजनीतिक, राजनयिक और मानवीय विकल्प तलाशना था. इसमें तनाव कम करने, युद्धविराम और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने पर चर्चा हुई.
बैठक की शुरुआत में ट्रंप ने इसे अपने दिन की “सबसे अहम बैठक” बताया. उन्होंने कहा, “हम गाज़ा में युद्ध को खत्म करना चाहते हैं और शायद इसे अभी खत्म कर सकते हैं.” इससे पहले ट्रंप ने महासभा में आम बहस के दौरान हमास पर शांति प्रस्तावों को ठुकराने का आरोप लगाया और फिलिस्तीनी राज्य को हाल ही में मान्यता देने वाले देशों की आलोचना की.
क़तर के अमीर शेख तमीम ने इस बैठक के लिए ट्रंप को धन्यवाद देते हुए कहा कि अरब देश युद्ध खत्म करने और बंधकों की रिहाई के लिए उन पर भरोसा कर रहे हैं. बैठक के बाद ट्रंप ने मीडिया से लंबी बातचीत नहीं की, लेकिन इसे “बहुत अच्छी मुलाकात” बताया.
उधर, संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में ट्रंप ने कहा, “जो लोग शांति चाहते हैं, उन्हें एक संदेश के साथ एकजुट होना चाहिए: बंधकों को तुरंत रिहा करो.” उन्होंने चेतावनी दी कि हमास को किसी भी तरह का पुरस्कार उसके अत्याचारों को बढ़ावा देगा.
गौरतलब है कि इस हफ्ते ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, पुर्तगाल और यूनाइटेड किंगडम समेत 10 देशों ने औपचारिक रूप से फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता दी है, जिस पर ट्रंप ने गहरी असहमति जताई.
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