अमेरिका का 50% टैरिफ लागू, भारतीय निर्यातकों पर असर; तिरुपुर-नोएडा-सूरत में उत्पादन ठप
अमेरिकी सरकार ने भारत से आयातित सामान पर 50% टैरिफ लागू करने का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) की अधिसूचना के बाद भारतीय निर्यात उद्योग में हलचल मच गई है।
मोदी का ‘वोकल फॉर लोकल’ आह्वान
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीयों से “वोकल फॉर लोकल” बनने और घरेलू उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। सरकार का जोर निर्यात पर निर्भरता घटाकर स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने पर है।
47 अरब डॉलर के निर्यात पर असर
नए टैरिफ से करीब 47 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यात प्रभावित हो सकते हैं। इसमें 7 अगस्त से लगे 25% टैरिफ और रूस से भारत के तेल आयात पर दंडस्वरूप लगाया गया अतिरिक्त 25% शुल्क शामिल है।
- कार्पेट पर शुल्क 2.9% से बढ़कर अब 52.9% हो गया।
- निटेड अपैरल पर 63.9%, वूवेन अपैरल पर 60.3%,
- टेक्सटाइल मेड-अप्स पर 59%,
- झींगा (श्रीम्प) पर 60%,
- हीरे-गहनों पर 52.1%,
- मशीनरी पर 51.3%,
- फर्नीचर व बेड पर 52.3% टैरिफ लगेगा।
किन सेक्टरों को छूट
फार्मा, स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान, तथा पेट्रोलियम उत्पादों को टैरिफ से छूट दी गई है। हालांकि अमेरिका चाहता है कि भारत कृषि, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र में टैरिफ मुक्त बाज़ार उपलब्ध कराए।
उत्पादन और नौकरियों पर संकट
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, तिरुपुर, नोएडा और सूरत की कई कपड़ा इकाइयों ने लागत बढ़ने के कारण उत्पादन रोक दिया है। तिरुपुर के निर्यातकों का अनुमान है कि इस टैरिफ से उन्हें करीब 1.5 लाख नौकरियों का नुकसान और लगभग 12,000 करोड़ रुपये के राजस्व का घाटा उठाना पड़ सकता है। तिरुपुर भारत के कुल निटवियर निर्यात का 68% हिस्सा है और करीब 10 लाख लोग यहां कार्यरत हैं।
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