अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर ईरानी अधिकारी विरोध प्रदर्शन करने वालों को फांसी की सजा देते हैं, तो अमेरिका “बहुत सख्त कार्रवाई” करेगा।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान में बीते कई दिनों से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं और सरकार की कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना तेज हो गई है।
मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि ईरान में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं। नॉर्वे स्थित एनजीओ ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) के अनुसार, अब तक 734 मौतों की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें नौ नाबालिग भी शामिल हैं। संगठन का कहना है कि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है। हालांकि, ईरानी सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि हालात नियंत्रण में हैं।
प्रदर्शन और सरकारी दावे
गुरुवार से शुरू हुए ये प्रदर्शन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद सत्ता के लिए सबसे बड़ी चुनौती माने जा रहे हैं। आरोप हैं कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दमन की जानकारी बाहर जाने से रोकी गई। इंटरनेट ब्लैकआउट पांच दिनों से अधिक समय तक जारी रहा, हालांकि मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय कॉल सेवाएं आंशिक रूप से बहाल की गईं।
ट्रंप का अल्टीमेटम
सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान फांसी देना शुरू करता है, तो अमेरिका कार्रवाई करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि “हजारों लोगों को मारा जा रहा है और अब फांसी की बात हो रही है।” तेहरान के अभियोजकों ने संकेत दिए हैं कि कुछ गिरफ्तार लोगों पर ‘ईश्वर के खिलाफ युद्ध’ जैसे आरोप लगाए जा सकते हैं, जिनमें मौत की सजा का प्रावधान है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ईरानियों से प्रदर्शन जारी रखने की अपील भी की। उन्होंने लिखा कि जब तक प्रदर्शनकारियों की हत्या बंद नहीं होती, तब तक ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द रहेंगी। इससे पहले ट्रंप कई मौकों पर ईरान के खिलाफ सैन्य हस्तक्षेप की चेतावनी भी दे चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया तेज
ईरान में हालात को लेकर यूरोपीय देशों ने भी सख्त रुख अपनाया है। फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने ईरानी राजदूतों को तलब किया है। यूरोपीय संघ प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि ईरान में बढ़ती मौतों की खबरें भयावह हैं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर और प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
मौतों और गिरफ्तारियों के दावे
IHR के निदेशक महमूद अमीरी-मोगद्दम के अनुसार, संगठन के पास उपलब्ध आंकड़े देश के आधे से भी कम प्रांतों और 10 प्रतिशत से कम अस्पतालों पर आधारित हैं। एनजीओ ने 26 वर्षीय एरफान सोलतानी का मामला भी सामने रखा है, जिन्हें पिछले सप्ताह कराज से गिरफ्तार किया गया था। परिवार का दावा है कि उन्हें मौत की सजा सुनाई जा चुकी है और जल्द फांसी दी जा सकती है।
सरकारी पक्ष
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, प्रदर्शनों के दौरान दर्जनों सुरक्षा बलों की मौत हुई है। सरकार ने इन्हें ‘शहीद’ बताते हुए तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है और बुधवार को तेहरान में सामूहिक अंतिम संस्कार की तैयारी की गई है।
सोमवार को सरकार समर्थक रैलियां भी आयोजित की गईं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने इन रैलियों को प्रदर्शनकारियों की “हार” करार दिया और कहा कि यह घटनाक्रम अमेरिका के लिए चेतावनी है। 86 वर्षीय खामेनेई 1989 से सत्ता में हैं।
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