ईरान कर रहा युद्धविराम प्रस्ताव की समीक्षा, ट्रंप ने जताई बातचीत की उम्मीद; तेल कीमतों में गिरावट

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अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव को समाप्त करने की कोशिशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान प्रस्तावित युद्धविराम समझौते के अंतिम मसौदे पर अपना जवाब तैयार कर रहा है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत अब भी जारी है और संवाद की प्रक्रिया रुकी नहीं है।

ट्रंप ने उन अटकलों को भी खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच संपर्क टूट गया है। संभावित समझौते की उम्मीदों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों ने राहत की सांस ली।

इस बीच, क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसकी नौसेना की अनुमति के बाद पिछले 24 घंटों में 24 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरे हैं। दूसरी ओर, दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनियों में से एक एमएससी ने बताया कि इराक के उम्म कसर बंदरगाह पर खड़े उसके एक जहाज पर दो प्रक्षेपास्त्रों से हमला किया गया।

आईआरजीसी ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि यह कार्रवाई ओमान की खाड़ी में एक ईरानी पोत पर हुए अमेरिकी हमले के जवाब में की गई। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किए जाने के तीन महीने से अधिक समय बाद भी संघर्ष किसी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंच सका है और हालात एक तरह के गतिरोध में फंसे हुए हैं।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान प्रस्तावित समझौते के मसौदे पर सावधानी से विचार कर रहा है। अमेरिकी नीतियों को लेकर लंबे समय से बने अविश्वास के कारण तेहरान वार्ता में सख्त रुख अपनाए हुए है। वहीं ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि अगले सप्ताह तक युद्धविराम को आगे बढ़ाने और होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य समुद्री यातायात बहाल करने को लेकर प्रगति हो सकती है।

हालांकि, परमाणु कार्यक्रम सहित कई अहम मुद्दे अब भी विवाद का विषय बने हुए हैं। इसी कारण शांति समझौते की दिशा में बढ़ रहे प्रयासों के बावजूद किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचना आसान नहीं माना जा रहा।

ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबॉफ ने भी संकेत दिया है कि किसी संभावित समझौते में लेबनान समेत क्षेत्र के अन्य मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रावधान शामिल होना चाहिए। उनका कहना है कि व्यापक युद्धविराम के बिना स्थायी समाधान संभव नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इजरायल अपने अभियान जारी रखता है तो ईरान वार्ता प्रक्रिया पर पुनर्विचार कर सकता है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने भी एक बार फिर संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की वकालत की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए बातचीत ही सबसे प्रभावी रास्ता है और भारत लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।

उधर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि केवल होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के बदले ईरान को प्रतिबंधों में राहत देने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों में किसी भी तरह की ढील ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तों की पूर्ति पर निर्भर करेगी। रुबियो के अनुसार, परमाणु वार्ता बेहद जटिल प्रक्रिया है और किसी ठोस समझौते तक पहुंचने में अभी कई महीने लग सकते हैं।

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