ट्विशा शर्मा केस: जेल में भी नहीं थमा गिरिबाला सिंह और बेटे समर्थ का विवाद, अस्पताल वार्ड में रखने पर जांच

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भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में न्यायिक हिरासत में बंद रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह एक बार फिर विवादों में आ गए हैं।

इस बार मामला जेल के भीतर उन्हें दी गई सुविधाओं से जुड़ा है। भोपाल सेंट्रल जेल पहुंचने के बाद दोनों को अस्पताल वार्ड में रखे जाने पर सवाल उठे, जिसके बाद जेल मुख्यालय ने जांच के आदेश दिए। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट जेल महानिदेशक (डीजी) वरुण कपूर को सौंप दी गई है।

सीबीआई जांच के बाद अदालत ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। जेल सूत्रों के अनुसार, गिरिबाला सिंह को महिला वार्ड में बने इमरजेंसी मेडिकल सेक्शन में रखा गया था, जबकि समर्थ सिंह को जेल अस्पताल के एक अलग हिस्से में रखा गया। यह जानकारी सामने आते ही विशेष सुविधा दिए जाने के आरोप लगने लगे और मामला चर्चा का विषय बन गया।

विवाद बढ़ने के बाद जेल प्रशासन ने दोनों को अस्पताल वार्ड से हटाकर सामान्य बैरकों में शिफ्ट कर दिया। इसके साथ ही जेल मुख्यालय ने पूरे मामले की जांच का जिम्मा डीआईजी संजय पांडे को सौंपा। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट डीजी जेल को भेज दी गई है, हालांकि इसकी विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

इस बीच, अदालत में पेशी के दौरान भी मामले ने नाटकीय मोड़ लिया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में सुनवाई के दौरान सीबीआई ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और फोरेंसिक रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच तथा अन्य अहम साक्ष्यों का परीक्षण बाकी है।

सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह ने अदालत के सामने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि न्यायिक सेवा के दौरान उन्होंने कई अपराधियों को सजा सुनाई थी और अब वही लोग उसी जेल में बंद हैं, जिससे उन्हें और उनके बेटे को खतरा हो सकता है। उन्होंने अदालत से सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

गिरिबाला सिंह ने यह आरोप भी लगाया कि जबलपुर अदालत परिसर में उनके बेटे समर्थ सिंह के साथ मारपीट की गई थी और इस घटना की सीसीटीवी फुटेज जांचे जाने की मांग की। हालांकि पीड़िता पक्ष के वकील अनुराग श्रीवास्तव ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी पक्ष लगातार मामले को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि समर्थ सिंह लंबे समय तक फरार रहा था और उस पर इनाम भी घोषित किया गया था।

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